इस फिल्म को अपने यहाँ भारत में बहुत से लोग देख चुके होंगे. ( मुझे तो अभी अभी पता चला कि हालीवुड की बड़ी फिल्मों की कितनी बड़ी मण्डी है भारत .)
विशाल रजतपट , त्रि-आयामी सजीव प्रोजेक्शन, विशाल सेट्स, संगणक आधारित चमत्कारी दृश्यावली, एनिमेशन चरित्रों तथा मानव चरित्रों वाले दृश्यों का संयोजन, अभिनय, संगीत, संवाद, निर्देशन, सभी कुछ अप्रतिम , किसी एक ही फिल्म में वर्षों बाद ही हो पाता है.अवतार सच में वैसी ही एक फिल्म है.
इन सब के अलावा जिस कारण से मुझे यह फिल्म बहुत ख़ास लगी , वह है इस का कथानक. एक हिसाब से यह साईं फाई यानी साइंस फिक्शन या साइंस फंतासी है. और यह विधा फिल्मों तथा सीरिअल्स में कई बार आ चुकी है. इसलिए यह कोई खासियत नहीं हुई.
जो ख़ास-उल-ख़ास लगा वह है इस कथानक के माध्यम से दिया गया सन्देश.पैन्डोरा हमारी दुनिया के अन्दर/बाहर कहीं भी हो सकता है और वहां हमारे लिए उपयोगी और महत्त्वपूर्ण खनिज संपदा हो सकती है.क्या मात्र इसलिए कि हमें वह संपदा प्राप्त करनी है, हम वहां पहुँच कर , वहां की सभ्यता पर वहां की निर्दोष आबादी पर , बर्बर हमला कर सकते हैं और उन के प्रतिरोध के स्वाभाविक अधिकार को नकारते हुए उन्हें ही बर्बर तथा हिंसक कह सकते हैं?
प्रजातंत्र का इतना बढ़िया अनुभव, शायद मुझे नहीं होता यदि मैंने यह फिल्म भारत में देखी होती. इतने बड़े पैमाने पर प्रदर्शित इस फिल्म में दर्शकों की लम्बी लम्बी कतारें , टिकिटों की मारामारी , और फिल्म में सही जगह पर बजती तालियाँ रेखांकित कर रहीं थीं कि यहाँ प्रजातंत्र है.
धन्यवाद कैमरून्स! धन्यवाद अमेरिका!!
आज इतना ही
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